दीप त्रिवेदी की पुस्तक **’मैं समय हूँ’ (Main Samay Hoon)** से शीर्ष 50 अनमोल विचार यहाँ दिए गए हैं। ये उद्धरण इतने प्रभावी और स्पष्ट हैं कि इन्हें बिना किसी संदर्भ के भी आसानी से समझा जा सकता है।
सभी उद्धरणों के साथ उनके पृष्ठ क्रमांक (Page Numbers) दिए गए हैं:
1. “आदमी नहीं, उसका समय बलवान होता है।” (Page 9)
2. “समय कुदरत की अंतिम निर्णायक सत्ता है।” (Page 9)
3. “ब्रह्मांड की हर क्रिया-प्रतिक्रिया समय के अधीन है।” (Page 9)
4. “समय के दो-चार नहीं, हजारों-लाखों स्वरूप हैं।” (Page 9)
5. “जो भी अपने होने से संतुष्ट होगा, वह हमेशा शक्ति से भरपूर होगा।” (Page 12)
6. “समय है तो स्पेस है, और स्पेस है तो समय होना ही है।” (Page 12)
7. “इच्छा समय का प्रथम स्वभाव है।” (Page 12)
8. “समय स्वचालित है, जबकि यह सम्पूर्ण स्पेस उससे चलायमान है।” (Page 13)
9. “जो वस्तु अस्तित्व में आएगी वह एक दिन खत्म भी होगी ही।” (Page 15)
10. “समय किसी भी वस्तु को रातोंरात खत्म नहीं करता, बढ़ते वक्त के साथ उसकी मार लगातार पड़ती रहती है।” (Page 15)
11. “समय की मार पहचानने से महत्त्वपूर्ण कोई शिक्षा संसार में उपलब्ध नहीं है।” (Page 16)
12. “सफल व्यक्ति को मालूम हो या न हो, वह जाने-अनजाने समय की मारों से बचना सीख ही गया होता है।” (Page 19)
13. “आपके जहन में उठनेवाले सारे भाव जैसे सुख, दुःख, चिंता, आनंद… सब सिर्फ समय है।” (Page 21)
14. “जब समय की गति धीमी हो जाती है, तब आपको ऐसा आभास होता है कि आप दुःखी या चिंतित हैं।” (Page 23)
15. “सुख-दुःख या शांति-अशांति जैसी कोई चीज है ही नहीं, यह सब आपका भ्रम है।” (Page 24)
16. “जैसी गति-वैसी मति।” (Page 26)
17. “समय सारे घाव भर ही देता है।” (Page 33)
18. “बुद्धि का उपयोग सिर्फ आवश्यकतानुसार करनेवाले की ही जीवन में जीत है।” (Page 34)
19. “अधिकांश मनुष्यों को तो उनकी याद्दाश्त ही मार डालती है।” (Page 34)
20. “आपका अपना एक अलग विश्व है।” (Page 36)
21. “इस ब्रह्मांडरूपी विश्व से आपका कुछ लेना-देना नहीं, आप जीते व मरते दोनों अपने ही विश्व में हैं।” (Page 36)
22. “मनुष्य अपने जगत का विकास और विनाश… दोनों करने के लिए पूर्ण स्वतंत्र होता है।” (Page 39)
23. “स्वतंत्र मनुष्य न तो दूसरे को ब्लेम कर सकता है और ना ही कोई आसरा खोज सकता है।” (Page 43)
24. “एकबार जब कुछ कर दिया तो फिर घटनाएं अपने हिसाब से नियमपूर्वक घटनी प्रारंभ हो जाती हैं।” (Page 43)
25. “बच्चों को जवाबदार बनाना ही सबसे बड़ी शिक्षा है।” (Page 45)
26. “आपके विश्व में क्या होना और क्या नहीं, यह आपके ही हाथ में है।” (Page 46)
27. “डेटा डालते वक्त बरती गई सजगता ही आपके विश्व को बचा सकती है।” (Page 54)
28. “समय के सारे कार्य आम मनुष्यों की सोच से उलटे हैं।” (Page 55)
29. “दोष आपकी बाहरी परिस्थितियों में नहीं, आपकी इच्छाओं में है।” (Page 57)
30. “परिस्थिति चाहे कोई क्यों न हो, संभावनाएं हर हाल में तीन ही होती हैं।” (Page 59)
31. “जो अपने जीवन में सिर्फ वर्तमान का चुनाव करता चला जाएगा, वह जीवन में आगे बढ़ता चला जाएगा।” (Page 63)
32. “प्रत्येक क्रिया की बराबरी पर उसके विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।” (Page 66)
33. “बिना समझे और जब तक अत्यावश्यक न हो, मन के भीतर कोई डेटा डालें ही मत।” (Page 74)
34. “बाहरी परिस्थितियों का आपके विश्व पर यानी आपके मन पर कोई प्रभाव नहीं है।” (Page 75)
35. “बुद्धि के सोचने या तय करने का मनरूपी कम्प्यूटर पर कोई असर नहीं होनेवाला।” (Page 77)
36. “अनावश्यक डेटा से भरी हार्डडिस्क ही आपके जीवन को निखारने में बाधा है।” (Page 78)
37. “जो कार्य करने के साथ ही समाप्त हो जाता है, उसे रूपांतरण कहते हैं।” (Page 79)
38. “स्कूल के लास्ट-बेंचर वास्तविक जीवन में अक्सर फर्स्ट-बेंचर सिद्ध होते हैं।” (Page 80)
39. “एक कम्प्यूटर का एक ही की-बोर्ड होता है, और वह मालिक के कन्ट्रोल में होता है।” (Page 83)
40. “अच्छी सायकोलॉजी का अर्थ ही यह है कि जो आपके जीवन में समय की गति को बढ़ा दे।” (Page 82)
41. “मनुष्य की सबसे बड़ी गरिमा उसकी परम-स्वतंत्रता है।” (Page 152)
42. “मृत्यु के बाद आपका नाश नहीं होता, केवल स्वरूप का रूपांतरण होता है जिसे पुनर्जन्म कहते हैं।” (Page 87)
43. “हार्डडिस्क खाली करना ही मनुष्य-जन्म का एकमात्र मकसद है।” (Page 95)
44. “स्वयं से टूटी उम्मीदों को आप फ्रस्ट्रेशन के रूप में जानते हैं।” (Page 100)
45. “ज्ञानी वही है जिसे यह समझ आ जाए कि वह कुछ नहीं जानता।” (Page 161)
46. “हर चीज की एक सीमा होती है।” (Page 125)
47. “जो घट गया है उसे तुरंत स्वीकारने की क्षमता बढ़ाओ।” (Page 132)
48. “वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा न मिला है ना मिलेगा।” (Page 139)
49. “राजा को रंक और रंक को राजा बनाना वक्त का ही काम है।” (Page 139)
50. “जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह भी अच्छा हो रहा है; और आगे जो होगा वह भी अच्छा ही होगा।” (Page 139)